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गुरुवार, 2 जुलाई 2020

Hindi Kids Story Short Moral Motivational Hindi Stories

Hindi Kids Story Best Interesting Stories 

Hindi Kids Story
Hindi Kids Story

इन छोटी कहानियों से अच्छे नैतिकता के साथ सीखे गए पाठों को आत्मसात करके अपने जीवन में एक अच्छा बदलाव लाना शुरू करें। एक अच्छी नैतिकता के लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं है!  पढ़ने के लिए और इसका सबसे अच्छा उपयोग करें। यह Stories उन लोगों के लिए भी मददगार है, जो अपने पढ़ने के कौशल में सुधार करना चाहते हैं।

Hindi Stories and Moral Khaniya in Hindi.  Here you can get more Inspirational and motivational stories

1. काला बकरा और सफ़ेद बकरा

एक टीवी चैनल का रिपोर्टर किसी दूर दराज़ के गाँव गया एक न्यूज़ का फिल्म बनाने. उसने तय किया की वो एक गरीब चरवाहे की स्टोरी बनाएगा और उसका इंटरव्यू लेगा 
गाँव में खोजा तो उसे सबने हकीरा का इंटरव्यू लेने को कहा , हकीरा का पास दो बकरे थे - एक काला और एक सफ़ेद … 
रिपोर्टर - तो हकीरा जी ! आप अपने बकरे को कहा चराते है … 
हकीरा - किस बकरे को ? सफ़ेद वाले को की काले वाले को ?
रिपोर्टर - ऐसा हैं ! तो सफ़ेद वाले का बताओ 
हकीरा - उसे मैं पहाड़ी के उस पार चराता हूँ 
रिपोर्टर - और काले वाले को ?
हकीरा - उसे भी वही चराता हूँ 
रिपोर्टर - आप अपने बकरे को रात में कहा सुलाते है ?
हकीरा - किस बकरे को ? सफ़ेद वाले को की काले वाले को ?
रिपोर्टर - सफ़ेद वाले को 
हकीरा - उसे मैं बाहर सुलाता हूँ 
रिपोर्टर - और काले वाले को ?
हकीरा - उसे भी वही सुलाता हूँ , बाहर . 
रिपोर्टर - अच्छा ! … और आप अपने बकरे को क्या खिलाते है ?
हकीरा - किस बकरे को ? सफ़ेद वाले को की काले वाले को ?
रिपोर्टर (खीजते हुए ) - सफ़ेद वाले को 
हकीरा - उसे मैं चना के छिलके का चारा खिलाता हूँ 
रिपोर्टर - और काले वाले को !?
हकीरा - उसे भी वही खिलाता हूँ 
रिपोर्टर को बहुत गुस्सा आया - अबे साले !! जब दोनों को एक ही जगह चराते हो , एक ही जगह सुलाते हो और एक सा खिलाते हो तो ये काला सफ़ेद - काला सफ़ेद क्या लगा रखा है !???
हकीरा - जनाब ! … (गला साफ़ करते हुए ) … बात ऐसी है की सफ़ेद वाला बकरा मेरा हैं ..
रिपोर्टर - और काला वाला किसका है !?
हकीरा - वो भी मेरा ही है …
रिपोर्टर ने कुए में छलांग लगा ली ..

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2.स्कूल का निरिक्षण - शिव जी का धनुष

रामायण के अनुसार सदियों पहले श्री राम ने सीता स्वयंबर के दौरान शिव जी का धनुष तोडा था, जो जनक राज के पास था. 
एक सरकारी स्कूल का इंस्पेक्शन करने शिक्षा अधिकारी आये हुए थे . 
एक क्लास में आए और बच्चो से पूछा - “बच्चो ये बताओ की शिव जी का धनुष किसने तोडा ?”
सभी बच्चे बगली झाकने लगे. शिक्षा अधिकारी को बड़ा आश्चर्य हुआ . आठवी क्लास के छात्र और इतना आसान सा जवाब नहीं दे सकते .
“तुम बताओ !” - एक बच्चे से बोला . 
डरते डरते वो खड़ा हुआ - “सर जी ! वो क्या हैं ना … मैंने नहीं तोडा … कसम से मैंने तो शिव जी का धनुष देखा भी नहीं है 
शिक्षा अधिकारी बिलबिला कर एक और लड़के को खड़ा किया वो बोला - “सर मैंने भी नहीं तोडा .. आप क्लास मॉनिटर मोहन से पूछ ले … मैं तो बीमार था कई दिनों से .
क्लास मॉनिटर मोहन डरते डरते खड़ा हुआ और बोला - “सर ! वो क्या हैं ना .. इस क्लास में सबसे बदमाश भूरे लाल है … मुझे पक्का यकीन हैं की भूरे लाल ने ही शिव का धनुष तोडा होगा ..आज वो स्कूल आया भी नहीं इस लिए ”
शिक्षा अधिकारी गुस्से से मास्टर साहब से बोले - “क्या मास्टर साहब ! कोई बता नहीं पा रहा है की शिव जी का धनुष किसने तोडा? “
मास्टर साहब डरते हुए बोले - “सर जी ! जाने दे अभी नादान बच्चे है ! मुझे भी लगता है शिव का धनुष भूरे लाल ने ही तोडा होगा . वो बहुत शैतान हैं !”
शिक्षा अधिकारी गुस्से से वहा से निकले और सीधे पहुच गए प्रिंसिपल साहब के ऑफिस में . 
“प्रिंसिपल साहब ! क्या चल रहा हैं ? बच्चो से पूछा की शिव जी का धनुष किसने तोडा - तो वो कहते हैं की भूरे लाल ने तोडा - और तो और मास्टर साहब को भी नहीं पता और वो कहते हैं जाने दीजिये भूरे लाल ने ही तोडा होगा !!”
प्रिंसिपल साहब - “अरे सरजी जाने दे ! अभी बच्चे है - माफ़ करदे !! मुझे बताये की कितने रूपये का धनुष था , मैं नुक्सान की भरपाई कर देता हूँ .”
शिक्षा अधिकारी बेहोश हो गए !

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3. डाकु कवि

एक कवि गरीबी से तंग आके डाकू बन गया 
डकैती करने वो बैंक गया और जाके सबके ऊपर पिस्तौल तान दिया और बोला 
“अर्ज़ किया है …
तकदीर में जो हैं , वोही मिलेगा 
तकदीर में जो है, वोही मिलेगा 
हैंड्स उप ! अपनी जगह से कोई नहीं हिलेगा !!”
केशियर के पास जाके कहता है - 
“अपने कुछ ख़्वाब मेरी आँखों से निकाल लो 
अपने कुछ ख़्वाब मेरी आँखों से निकाल लो
जो कुछ भी तुम्हारे पास है जल्दी से इस बैग में डाल दो !! 
जब वो बैंक लूट चूका था तो जाते जाते बोल के जाता है - 
“भुला दे मुझे , क्या जाता है तेरा 
भुला दे मुझे , क्या जाता है तेरा 
मैं गोली मार दूंगा जो किसी ने पीछा किया मेरा !! “

3. हाथी मेरे साथी

एक महावत था जिसका एक हाथी काफी बुढा हो गया था . 
 महावत ने सोचा अब ये किसी काम का नहीं है , अगर इसे अभी नहीं बेचा तो इसका कोई दाम नहीं मिलेगा . ऐसा सोचकर वो उसे गाँव के पशु मेले में ले आया . 
उसने हाथी को खूब साफ़ करके उसपर खूब सारा काला रंग और तेल लगा दिया . ये सब करने से हाथी जवान लगने लगा . 
मेले में दूर दूर से लोग उस हाथी को देखने आते . कुछ रईश लोग उसको लेने के लिए भी उत्सुक दिखे . 
महावत को अपनी तरकीब काम करती नज़र आ रही थी . 
एक दिन हकीरा भी मेले में पहुचा . वो हाथी देखेते ही अपनी भौ सिकोड़ के खड़ा हो गया . वो हाथी को कभी आगे से कभी पीछे से देखता . महावत का तो जी आधा हो गया . उसको लगा - लगता हैं इस आदमी को पता चल गया है की हाथी बुढा है . 
महावत दौड़ के हकीरा के पास आया , और झट से उसे ले के दूर चला गया . महावत ने एक सौ रूपये हकीरा को दिए और बोला - “चलो चलो ! रख लो .. और जाओ यहाँ से .
हकीरा ने कहा - “परन्तु मैं ये कह रहा था कि …” 
महावत ने जल्दी से उसे वहा से और दूर ले जाके कहा - “हो गया ! जाओ भी ..” 
 हकीरा वहा से चला गया . 
महावत ने पता लगाया तो पता चला की हकीरा उस गाँव का सबसे बुद्धिमान आदमी हैं .
दुसरे दिन हकीरा फिर से आया और लगा हाथी का मुआयना करने . कभी आगे से कभी पीछे से 
. महावत दौड़ के हकीरा के पास आया , और झट से उसे ले के दूर चला गया . महावत ने इस बार पांच सौ रूपये हकीरा को दिए और बोला - “अरे भाई ! कोई बात नहीं … जाओ यहाँ से .. “ 
हकीरा कुछ कह पाता इसके पहले महावत ने उसे वहाँ से दूर कर दिया . 
अगले दिन हकीरा फिर से आया और लगा हाथी का मुआयना करने . कभी आगे से कभी पीछे से . 
महावत को बड़ा गुस्सा आया . 
महावत (सबके सामने चिल्लाते हुए ) - क्या है ? क्या पता कर लिए तुम इस हाथी के बारे में ? 
हल्ला गुल्ला सुन के लोगो की भीड़ लग गयी 
हकीरा - अरे जनाब मैं ये कह रहा था की इसका … 
महावत (और जोर से चिल्लाते हुए ) - इसका क्या ? क्या इसका ? तुम यह कैसे कह सकते हो की ये हाथी बुढा है? 
हकीरा - ऐसा है की .. मैं समझ नहीं पा रहा
महावत - अरे क्या समझ गए … क्या नहीं समझ पा रहे .. चलो मैंने माना की ये हाथी बुढा और बेकार है .. तो क्या … जाओ यार तुम्हारे गाँव में मुझे सौदा ही नहीं करना .. 
लोगो के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रही . लोगो में कानाफूसी शुरू हो गयी . 
हकीरा - मेरी बात तो सुनिए … 
महावत (सर पर हाथ रख के बैठ गया ) - जाओ यहाँ से यार . मैं माँ गया तुम बहुत बुद्धिमान हो .. 
हकीरा - मेरी बात तो सुनिए … 
महावत - बोलो भाई ! बोलो ! 
हकीरा - मैं समझ नहीं पा रहा हूँ की इस जानवर की पूँछ आगे है या पीछे ..
महावत दीवाल पर सर पटकने लगा . 
हकीरा ने पीछे से बोला - और हाँ . इसका मुंह तो है ही नहीं ?? 
महावत ने पलट के देखा और जोर से रोने लगा !!

4. तारे ही तारे 

महान जासूस शर्लाक होम्स और उनके मित्र डॉक्टर वाटसन एक बार जंगल में कैंप लगाने और पिकनिक मनाने पहुचे . 
डॉक्टर वाटसन ने पूछा - होम्स ! तुम कठिन से कठिन केस सुलझा लेते हो .. ऐसा कैसे कर लेते हो .
शर्लाक होम्स - देखो तुमको किसी भी चीज़ के तह तक जाना हो तो तर्क लगाओ .. किसी चीज़ को वो जैसा हैं वैसा ही मत देखा .. सोचो की अगर ये ऐसा है तो ऐसा क्यू हुआ .. 
डॉक्टर वाटसन - मैं भी तुम्हारे तरह महान जासूस बनाना चाहता हूँ 
शर्लाक होम्स - ठीक हैं आज से हर चीज़ में तर्क लगाना शुरू करो 
देर रात तक बाते होती रही और बाद में खाना खा कर दोनों अपने टेंट के अन्दर जाके सो गए ..
रात में होम्स ने अचानक से डॉक्टर को जगाया ..
शर्लाक होम्स - वाटसन ! ऊपर देखो … तुमको क्या दिखता हैं ?
डॉक्टर वाटसन - मुझे असंख्य तारे दिख रहे हैं ..
शर्लाक होम्स - तो इसका क्या मतलब हुआ ?
डॉक्टर वाटसन समझ गए की उनको तर्क लगा कर बोलना है और जो जैसा है वो वैसा क्यू है और जो जैसा नहीं है वो वैसा क्यू नहीं है इत्यादि इत्यादि .. वो अपना चश्मा लगा के बैठ गए और गला साफ़ करके बोलने लगे
डॉक्टर वाटसन - एस्ट्रोनॉमी के अनुसार इसका मतलब हैं की ब्रह्माण्ड में लाखो तारामंडल हैं और करोडो ग्रह . 
ज्योतिष के अनुसार मुझे लगता है शनि इस वक़्त सिंह लग्न में है 
समय विज्ञान से मैं बता सकता हूँ की इस वक़्त पौने तीन बजे है 
अध्यात्म के अनुसार मैं कहता हूँ की भगवान कितना शक्तिशाली है जो इतने तारे और ग्रह बनाये और हम कितने छुद्र 
मौसम विज्ञान से बोलू तो आसमान साफ़ है और कल एक सुबह तेज़ धुप खिलेगी 
शर्लाक होम्स की तरफ देख कर बोले - तुमको क्या लगता हैं होम्स?
शर्लाक होम्स ने गहरी सांस खिंची और एक मिनट चुप रह के चिल्लाया - अबे गधे !! इसका मतलब ये है की किसी ने हमारा टेंट चुरा लिया है … और हम खुले आसमान के नीचे है …

5. प्रयास में कमी नहीं

जंगल का राजा शेर बहुत बीमार हो गया। उसे लगा कि अब वह नहीं बचेगा। उसने एक बंदर को अपना उत्तराधिकारी बना दिया।
एक दिन उसके पास एक बकरी अपनी समस्या लेकर पहुंची। समस्या सुनने के बाद बंदर एक डाल से दूसरी डाल पर कूदने लगा। करीब एक घंटे तक कूदा-फांदी करने के बाद वह पेड़ से नीचे उतर आया।
बकरी ने उससे पूछा, ‘राजा जी इससे मेरी समस्या कैसे हल होगी?’
बंदर ने जवाब दिया, ‘हां समस्या तो हल नहीं होेगी, लेकिन मेरे प्रयासों में कोई कमी हो तो बताओ।’

6.  पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट!

एक दिन दफ्तर से घर आते हुए पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट हो गयी;
और जो बीवी से मिलने की जल्दी थी वह ज़रा से लेट हो गयी;
जाते ही बीवी ने आँखे दिखाई - आदतानुसार हम पर चिल्लाई;
तुम क्या समझते हो मुझे नहीं है किसी बात का इल्म;
जरुर देख रहे होगे तुम सक्रेटरी के साथ कोई फिल्म;
मैंने कहा - अरी पगली, घर आते हे ऐसे झिडकियां मत दिया कर;
कभी तो छोड़ दे, मुझ बेचारे पर इस तरह शक मत किया कर;
पत्नी फिर तेज होकर बोली - मुझे बेवकूफ बना रहे हो;
6 बजे दफ्तर बंद होता है और तुम 10 बजे आ रहे हो;
मैंने कहा अब छोड़ यह धुन - मेरी बात ज़रा ध्यान से सुन;
एक आदमी का एक हज़ार का नोट खो गया था;और वह उसे ढूंढने के जिद्द पर अड़ा था;
पत्नी बोली, तो तुम उसकी मदद कर रहे थे;
मैंने कहा , नहीं रे पगली मै ही तो उस पर खड़ा था;
सुनते ही पत्नी हो गयी लोट-पोट;
और बोली कहाँ है वह हज़ार का नोट;
मैंने कहा बाकी तो खर्च हो गया यह लो सौ रुपये;
वह बोली क्या सब खा गए बाकी के 900 कहाँ गए;
मैंने कहा : असल में जब उस नोट के ऊपर मै खडा था;
तो एक
 लडकी की निगाह में उसी वक़्त मेरा पैर पडा था;
कही वह कुछ बक ना दे इसलिए वह लडकी मनानी पडी;
उसे उसी के पसंद के पिक्चर हाल में फिल्म दिखानी पडी;
फिर उसे एक बढ़िया से रेस्टोरेन्ट में खाना खिलाना पड़ा;
और फिर उसे अपनी बाइक से घर भी छोड़कर आना पड़ा;
तब कहीं जाकर तुम्हारे लिए सौ रुपये बचा पाया हूँ;
यूँ समझो जानू तुम्हारे लिए पानी पुरी का इंतजाम कर लाया हूँ;
अब तो बीवी रजामंद थी - क्यूंकि पानी पुरी उसे बेहद पसंद थी;
तुरंत मुस्कुराकर बोली : मै भी कितनी पागल हूँ इतनी देर से ऐसे ही बक बक किये जा रही थी;
सच में आप मेरा कितना ख़याल रखते है और मै हूँ कि आप पर शक किये जा रही थी!

7. विष्णु जी को ख़त

एक बच्चे को साइकिल चाहिए थी . उसके मा बाप ने मना कर दिया तो वो उदास हो गया . फिर उसके दीमाग में एक ख्याल आया की क्यू नहीं वो भगवान् से साइकिल के पैसे मांग ले . 
उसने एक लैटर लिखा और डाक खाने के डब्बे मैं दाल दिया . 
“क्षीर सागर 
वैकुण्ठ धाम 
विष्णु जी को मेरा प्रणाम ! 
यु तो आपका दिया सबकुछ है 
बस एक साइकिल की कमी है !!
अगर आप ५००० हज़ार भिजवा दे तो भक्त पर बड़ी कृपा होगी 
आपका - बंटी “
जब डाक विभाग वालो को ये पत्र मिला तो उनको बहुत दुःख हुआ. सबने चंदा इकठ्ठा किया और चार हज़ार रूपये जमा कर उस लड़के को मनी आर्डर भिजवा दिया . 
मनी आर्डर पाकर लड़का बहुत खुश हुआ . 
एक हफ्ते बाद उसने फिर से एक पत्र लिखा - विष्णु जी के नाम . 
“क्षीर सागर 
वैकुण्ठ धाम 
विष्णु जी को मेरा प्रणाम ! 
भगवन ! आपके भेजे हुए पैसे मिल गए , बहुत धन्यवाद्. 
वैसे आपने तो पुरे पांच हज़ार भेजे होंगे , पर बेडा गर्क हो इन डाक विभाग वालों का . सालों ने हज़ार रूपये डकार लिए .
आपका - बंटी !

8.  इनामी रकम

चंदू लाल को तैरना नहीं आता था . उन्होंने कसम ली थी की जब तक वो ठीक से तैरना नहीं सीख जायेंगे - पानी में कदम नहीं रखेंगे सावन का दिन था, गंगा नदी खूब उफान पर थी . चंदू लाल के मित्र मटकानाथ ब्रम्हचारी ने कहा - “चलो चंदुलाल तुमको तैरना सीखा दे
चंदुलाल ने कहा - “मैंने कसम की है, जब तक तैरना नहीं आये मैं पानी में पैर भी नहीं रखूँगा ” 
“अरे ! ऐसा भी क्या हो सकता है , बिना पानी में उतरे तुम तैरना नहीं सीख सकते ”, मटकानाथ ब्रम्हचारी ने कहा - “अब जिद्द छोडो और चलो गंगा जी में “.
चंदुलाल को लेकर मटकानाथ ब्रम्हचारी गंगा जी पहुच कर बोले - “वो बोर्ड देखो - डूबते को बचाने वाले को पांच सौ रूपये का इनाम - आज्ञा से जिल्लाअधिकारी ”
“अब तुम नदी में उतरो और जोर जोर से चिल्लाना - बचाओ बचाओ - मैं आके तुमको बाहर निकाल लूँगा - और दोनों लोग इनाम की रकम बांट लेंगे ”
चंदुलाल को आईडिया पसंद आया - वो उतर गए पानी में . घुटने तक पानी मैं जाते ही जोर जोर से चिल्लाने लगे “अरे डूब गया ! बचाओ बचाओ ”
मटकानाथ ब्रम्हचारी ने आँखे दिखाते हुए कहा - “अबे चुप कर ! कोई घुटने तक पानी में डूबता हैं क्या ? अरे और आगे जाओ - इनाम की रकम नहीं चाहिए क्या !?”
चंदुलाल डरते डरते आगे बढे और गले तक पानी हो जाने पर फिर से चिल्लाने लगे . 
मटकानाथ ब्रम्हचारी ने आँखे तरेरी और कहा - “और आगे !! मैं हूँ ना - क्यू डरते हो
इस तरह दो तीन बार हुआ और चंदूलाल पानी में बहुत आगे चले गए और सचमुच में डूबने लगे !!
“अरे मैं सच … में … (गुड गुड ) … डूब रहा हु … बचाओ … ” 
मटकानाथ ब्रम्हचारी ने कुछ नहीं कहा और नदी के किनारे मुस्कराते रहे . 
अब चंदूलाल की सांस छूटने लगी … जोर जोर से चिल्लाया - “अरे कमीने ! क्या कर रहा है … जल्दी … बचाओ … क्या तुम्हे पांच सौ रूपये नहीं चाहिये … !!??”
मटकानाथ ब्रम्हचारी ने उंगली से इशारा किया - पहले वाले बोर्ड के दुसरे तरफ एक और बोर्ड लगा था .. उसपर लिखा था - 
“तैरती लाश को निकलने वाले को इनाम एक हज़ार - आज्ञा से जिल्लाअधिकारी”

9. रेस्टोरेंट में - डीप फ्राइड

एक चाइनिज जिसे हिंदी या इंग्लिश ठीक से नहीं आती थी इंडिया आया और एक रेस्टोरेंट में गया . 
वेटर मेनू ले के आया और उसे दिया . 
उसने मेनू देखा और एक नाम के उंगली रख के बोला - “दिस … दिस … डीप फ्राइड … डीप फ्राइड … फ़ास्ट “
वेटर ने सर खुजाया और बोला - “सर कुछ और आर्डर करे … ये हम नहीं दे सकते “
चाइनिज - “नो … दिस .. दिस .. डीप फ्राइड … डीप फ्राइड …”
वेटर - “सॉरी … कुछ और आर्डर करे “
चाइनिज - “यु इंडियन !! ओनली दिस … फ़ास्ट फ़ास्ट …”
कुछ देर से चल रहे इस सिलसिले को देख कर रेस्टोरेंट का मेनेजर आ गया और वेटर से बोला - “अरे क्या बहस करते हो .. दे दो ना जो मांग रहा हैं “
वेटर बोला - “मेनेजर सर ! वो मेनू के नीचे लिखे आपके नाम पर ऊँगली रख के मांग रहा है - डीप फ्राइड - बोले तो दे दू ? “

10. नकली नोट

एक आदमी नकली नोट छपता था . एक दिन गलती से उसने पंद्रह रूपये की एक नोट छाप दी.. अब पंद्रह रूपये की नोट आती तो हैं नहीं .. 
उसने बहुत सोचा - “शहर में तो सब समझदार लोग होते हैं . अगर ये नोट यहाँ चलाने गया तो मैं पकड़ा जाऊंगा. हाँ अगर किसी दूर दराज़ के गाँव में गया तो शायद ये चल जाए .. “
ये सोच कर वो बहुत दूर बसे एक छोटे से गाँव में गया .. 
उसने देखा की लोहार लोहे की धौकनी में काम कर रहा हैं .. 
उसने लोहार से कहा - “अरे भाई ! मेरे एक नोट का छुट्टा करा दो .. “
ये कहके उसने पंद्रह रुपये का नोट आगे बढ़ा दिया … 
लोहार ने अपना हाँथ पोंछा और नोट को पकड़ कर देखने लगा … साथ ही साथ उसने नोट छापने वाले को भी एक नज़र देखा ..
उस आदमी की तो हलक सुख गयी … उसे लगा “लगता है लोहार ने पकड़ लिया …”
लोहार बोला - “भाई जी ! मेरे पास पंद्रह रूपये शायद ना हो .. मैं चौदह रूपये दे सकता हूँ “
नोट छापने वाले ने सोचा - “अरे चलो मेरा क्या जाता है .. चौदह ही सही"
उसने लोहार से कहा - “अब पंद्रह मिलते तो अच्छा होता .. पर लाईये चौदह ही दें दें ..”
लोहार अन्दर गया और बहार आके उसको पैसे पकड़ा दिए … 
उस आदमी ने गिनना चाहा तो देखा - दो सात रूपये के नोट हैं …
बिना कुछ कहे वो वह से चला गया …

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